स्वदेश कुमार
आस्ट्रेलिया में एक बिल्ली को मारने पर 6 साल की जेल हो जाती है। देश का खोजी कुत्ता अफगानिस्तान में जख्मी होता है तो उसे देखने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री केविन रड तक पहुंच जाते हैं। इंसानों को भी यहां कई तरह के अधिकार मिले हुए हैं, लेकिन भारतीय शायद कुत्ते और बिल्लियों से भी गए गुजरे हैं। तभी तो वहां उनके जख्मों पर न तो कोई मलहम लगाने वाला है और न ही कोई इंसाफ दिलाने वाला। नई दिल्ली स्थित अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त पूसा कैटरिंग कॉलेज से मैनेजमेंट की डिग्री लेकर आस्ट्रेलिया के मेलबर्न में स्थित पांच सितारा होटल क्राउन कैसीनो में शेफ की नौकरी करने वाले जयंत डागोर अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ लड़ाई पिछले 10 साल से लड़ रहे हैं। जब आस्ट्रेलिया में इंसाफ मिलने की उनकी सारी उम्मीदें जवाब दे गईं तब उन्होंने भारत आकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और विदेश मंत्री एसएम कृष्णा से गुहार लगाई है। वह चाहते हैं उनका मामला एमनेस्टी इंटरनेशनल और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार में उठाया जाए। 1999 में जयंत को कैरी पेकर के पांच सितारा होटल क्राउन कैसिनों में शेफ की नौकरी मिली, लेकिन यहां जयंत को अपने सीनियर माइकल शैल्टन उर्फ जौकी ने हर कदम पर प्रताडि़त करना शुरू कर दिया। उनके खिलाफ नस्लभेदी टिप्पणी और धक्कामुक्की आम बात हो गई। जयंत से अधिक ड्यूटी कराने के साथ-साथ भारी वजन उठाने को कहा जाता। जयंत समय-समय इसकी शिकायत एचआर मैनेजर से करते रहे, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। कुछ समय बाद जयंत को अपने दोनों हाथों का कारपल टनल होने पर ऑपरेशन कराना पड़ा। क्राउन कैसिनो के चिकित्सक ने भी अपनी रिपोर्ट में माना कि क्षमता से अधिक कार्य करने के कारण उनकी यह हालत हुई है। बाद में डॉक्टरों ने उन्हें मेडिकल अनफिट करार दिया। कुछ समय बाद जयंत दोबारा काम पर लौटे। इस बार शैल्टन ने उनके ऊपर 8-10 किलो का फ्रोजन चिकन का बाक्स ही दे मारा। उनकी गर्दन और सीने में गंभीर चोटें आई, जिसकी वजह से वह लंबे समय के लिए अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने इसकी शिकायत प्रबंधन के आला अधिकारियों से की। घटनास्थल पर मौजूद एक आस्ट्रेलियाई युवती ने इस मामले में गवाही भी दी। डेढ़ साल तक शैल्टन पर कोई कार्रवाई न होते देख जयंत को यूनियन की तरफ से स्लेटर एंड गार्डन नामक वकील मुहैया कराने वाली कंपनी के पास भेजा गया। यह फर्म जयंत को 4 साल इधर से उधर भगाती रही। इस दौरान उसके आठ वकील बदले गए। जयंत ने मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना के हर सबूत, जो वकीलों ने मांगे थे, उपलब्ध कराए, लेकिन उसका केस कोर्ट न जा सका। 4 साल खराब करने के बाद फर्म के वकीलों ने कह दिया कि आपका केस कमजोर है। जबकि इसी दौरान आस्ट्रेलियाई सरकार ने उन्हें विकलांग सहायता पेंशन देना शुरू कर दिया, यानी अब उन्हें काम करने के लिए अयोग्य करार दिया गया। जुलाई 2009 में जयंत ने लिखित शिकायत आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री केविन रड और उप प्रधानमंत्री जुलिया गिलार्ड को भेजकर न्याय की गुहार लगाई। 3 महीने के बाद केवल रड के कार्यालय से गोलमोल जवाब आया। इसके बाद जयंत ने मेलबर्न स्थित एमनेस्टी इंटरनेशनल और मानवाधिकार आयोग से मिलने के लिए समय मांगा, लेकिन उन्हें मना कर दिया गया। जयंत की लड़ाई में उनकी पत्नी अन्ना मारिया कंधे से कंधा मिलाकर साथ दे रही हैं, जो खुद एक आस्ट्रेलियाई हैं। भारत आए इस दंपति ने इसी 4 अगस्त को प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय को पत्र के माध्यम से पूरे मामले से अवगत करा दिया है।
Tuesday, 10 August 2010
Subscribe to:
Post Comments (Atom)


No comments:
Post a Comment